
चंडीगढ़: राज्यसभा के सात सांसदों ने पिछले दिनों आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका देते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया था। इन 7 सांसदों में से 6 पंजाब के हैं। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई। कई तरह के दावे किए जाने लगे। इनमें एक दावा था कि पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार गिर जाएगी। क्योंकि उसके कई विधायक बीजेपी ने जाने वाले राज्यसभा सांसदों के साथ संपर्क में हैं। इस बीच पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने श्रमिक दिवस पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया। इस सत्र में पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच सीएम भगवंत मान ने पंजाब सरकार का विश्वास मत पेश किया। इस विश्वास मत को विशेष सत्र के दौरान सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
भगवंत मान को क्यों उठाना पड़ा यह कदम
दरअसल राज्यसभा सभा के सात सांसदों के बीजेपी में शामिल हो जाने की वजह से आम आदमी पार्टी बैकफुट में आ गई थी। इस मुश्किल घड़ी सबकी निगाहें अब पंजाब सरकार पर थी। क्योंकि जिन 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी को अलविदा कहां, उनमें से 6 पंजाब से थे। आप छोड़ने वाले राघव चड्ढा ने दावा किया था कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के कई विधायक उनके संपर्क में हैं। ऐसे में इस स्थित में भगवंत मान ने अपने विधायकों की एकजुट दिखाने के लिए यह कदम उठाया। भगवंत मान ने विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
”आम आदमी पार्टी पूरी तरह मजबूत और एकजुट है। आप का झाड़ू भारत की राजनीति की सफाई करता रहेगा।”
पंजाब में आप के कितने विधायक
बता दें कि पंजाब में 117 विधानसभा सीटें है। आम आदमी पार्टी की बात करें तो वो यहां बड़ी मजबूत स्थित में हैं। 117 में से 94 विधायक उनके हैं। वहीं एक अन्य विधायक ने भी उन्हें समर्थन दे रखा है। हालांकि विधानसभा में जब विश्वास प्रस्ताव लाया गया तो अकाली दल, कांग्रेस और बीजेपी नेता सदन में मौजूद नहीं थे। वहीं आम आदमी पार्टी के 94 विधायकों में से 88 सदन में मौजूद थ। इस सदन बुलाने की रणनीति का मकसद राज्यसभा के 10 में से 7 सांसदों के जाने के असर को कम करना था।