साबुन, शैंपू और टूथपेस्ट वेज है या नॉनवेज, अब पता चलेगा, पैकेट पर लगेगा लाल-हरा निशान

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अब साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और कॉस्मेटिक्स खरीदते समय ग्राहकों को यह पता लगाना आसान होगा कि प्रोडक्ट वेज है या नॉनवेज. सरकार ने पैकेज्ड सामान की पैकिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. नए नियम के तहत साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और दूसरे कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज़ के पैकेट पर यह बताना जरूरी होगा कि प्रोडक्ट किस मूल का है.

पैकेट पर कैसे होगा वेज-नॉनवेज की पहचान?

नए नियम में इसके लिए अलग-अलग रंग के निशान तय किए गए हैं. अगर किसी प्रोडक्ट का मूल नॉनवेज है तो उसके पैकेट के मुख्य हिस्से में सबसे ऊपर लाल या भूरे रंग का डॉट लगाना होगा, वहीं अगर प्रोडक्ट वेज मूल का है तो पैकेट पर हरे रंग का डॉट लगाना होगा.

इसका मतलब यह हुआ कि ग्राहक को प्रोडक्ट के बारे में जानकारी लेने के लिए पैकेट पर लिखी लंबी जानकारी पढ़ने की जरूरत नहीं होगी. रंग के निशान से उसे आसानी से पता चल सकेगा कि प्रोडक्ट वेज है या नॉनवेज.

किन प्रोडक्ट्स पर होगा असर?

नए नियम का असर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले कई सामानों पर पड़ेगा. इनमें साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक्स और दूसरी टॉयलेटरीज़ शामिल हैं.

ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?

अभी तक कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज़ पर वेज या नॉनवेज मूल को लेकर ऐसी स्पष्ट पहचान की जरूरत नहीं थी. ऐसे में कई बार ग्राहक के लिए यह समझना आसान नहीं होता था कि प्रोडक्ट में इस्तेमाल सामग्री किस मूल की है. अब नए नियम के बाद पैकेट पर दिया गया हरा या लाल- भूरा डॉट ग्राहक को यह जानकारी जल्दी देने का काम करेगा. यानी आने वाले समय में साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट या कॉस्मेटिक्स खरीदते वक्त सिर्फ कीमत और ब्रांड ही नहीं बल्कि पैकेट पर लगा वेज-नॉनवेज निशान भी देखा जा सकेगा.

कब से लागू होगा नियम?

सरकार की अधिसूचना के मुताबिक, यह बदलाव गजट में प्रकाशित होने की तारीख से ही लागू हो चुका है. यानी साफ है अब पैकेज्ड कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज़ की लेबलिंग में वेज और नॉनवेज की पहचान को लेकर एक साफ नियम सामने आ गया है.

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