राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग पर सुनवाई टली, सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की है याचिका

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Supreme court hearing postponed Ram Setu: रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने से जुड़ी सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जुलाई के लिए टल गई है. आज सुब्रमण्यम स्वामी के वकील ने सुनवाई टालने की मांग की थी. वकील की ओर से कहा गया कि सुब्रमण्यम स्वामी की सेहत ठीक नहीं है. इस पर कोर्ट ने सुनवाई जुलाई के तीसरे हफ्ते के लिए टाल दी है.

सुब्रमण्यम स्वामी की मांग

सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट से मांग की है कि वो सरकार को निर्देश दे कि राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की उनकी मांग वाले ज्ञापन पर जल्द फैसला ले. स्वामी का कहना है कि रामसेतु असंख्य भक्तों की श्रद्धा और आस्था का विषय है. सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वो इस ऐतिहासिक धरोहर को पवित्रता बनाए रखें. इसे प्रदूषण और नुकसान से बचाए.

2023 में सरकार को ज्ञापन देने को कहा था

 सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि इससे पहले जनवरी 2023 में कोर्ट ने उनकी अर्जी पर सुनवाई की थी. तब सरकार की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने पर सरकार विचार कर रही है. तुषार मेहता ने सुझाव दिया था कि कोर्ट में सुनवाई के बजाए यह बेहतर होगा कि स्वामी सरकार को इसके लिए ज्ञापन दे. इसके मद्देनजर कोर्ट ने तब याचिका का निपटारा किया था.

सरकार का रुख अभी तक साफ नहीं

 सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने 27 जनवरी 2023 और 15 मई 2025 को सरकार को ज्ञापन भेजे थे लेकिन सरकार ने अभी तक अपने किसी फैसले से उन्हें अवगत नहीं कराया है. इसलिए उन्होंने फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा है.

क्या है रामसेतु का महत्व?

रामसेतु तमिलनाडु के रामेश्वरम और श्रीलंका के मन्नार के बीच आपस में जुड़ी लाइमस्टोन की एक श्रृंखला है. रामायण में इस बात का उल्लेख है कि यह पुल भगवान राम की वानर सेना ने बनाया था. यूपीए सरकार के शासनकाल में शुरु की गई सेतु समुद्रम परियोजना के लिए जहाजों के लिए रास्ता बनाने के लिए रामसेतु को तोड़ा जाना था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद यब योजना रुक गई थी. मौजूदा एनडीए सरकार कोर्ट में यह स्पष्ट कर चुकी है कि रामसेतु को नहीं तोड़ा जाएगा। लेकिन इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने पर सरकार ने अभी रुख साफ नहीं किया है.

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