मुस्लिमों को आरक्षण का सवाल ही नहीं… जाति जनगणना पर बड़ी घोषणा कर अमित शाह ने कह दी खरी-खरी

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भारी शोरगुल के बीच लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीनों बिल पेश हो चुके हैं. विपक्ष ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सपा के धर्मेंद्र यादव ने मुसलमानों का जिक्र करते हुए आरक्षण देने की बात की, तो गृह मंत्री अमित शाह ने ललकारते हुए कहा कि मैं साफ कर दूं कि इसका सवाल ही नहीं उठता. अखिलेश यादव ने सरकार की जल्दबाजी की वजह बताई. शाह ने चुन-चुनकर विपक्ष के जातीय जनगणना, अभी की गणना में कॉलम न होने और मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण की मांग पर करारा हमला बोला. शुरू से शुरू करते हैं.

दरअसल, जैसे ही तीनों बिल संसद में रखे गए, कांग्रेस ने आपत्ति जता दी. केसी वेणुगोपाल जिस रूल का सहारा लेकर बोलने लगे, उनकी आपत्ति के औचित्य पर रिजिजू ने सवाल किया. वह नहीं बैठे, तो गृह मंत्री अमित शाह खड़े हुए. उन्होंने कहा कि बिल के पुरस्थापित किए बगैर बिल के मेरिट्स पर चर्चा कैसे हो सकती है? अभी उन्हें तकनीकी आपत्ति है, तो ही वह ले सकते हैं. एक बार बिल पुरस्थापित होने के बाद ही बिल के मेरिट्स पर सदन के सदस्य बोल सकते हैं. अभी ये सदन इस स्टेज पर है कि बिल को पुरस्थापित करना या ना करना… उनको भाषण करने का पर्याप्त मौका मिलेगा. आप बड़े दयालु हो, (स्पीकर की तरफ इशारा करके) ज्यादा मौका देना उनको और हम भी कसकर जवाब देंगे. हमें कोई तकलीफ नहीं है. (पुरस्थापित का मतलब कानूनी रूप से सदन में बिल पेश करना है) कुछ देर बाद वोटिंग के बाद बिल पेश हो गया.

स्पीकर ने राहुल की चुटकी ले ली

इससे पहले, वेणुगोपाल बोल रहे थे. ओम बिरला ने चुटकी ली कि माइक पर बोलिए. आपका (राहुल की तरफ इशारा करते हुए) ही बंद होता है, इनका बंद नहीं होता. दरअसल, वेणुगोपाल अपनी जगह से हट गए थे और उन्होंने कह दिया कि माइक काम नहीं कर रहा है. आगे उन्होंने कहा कि हमने तो कहा था कि महिला आरक्षण बिल 2024 में ही लागू कर दिया जाए.

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