पहलगाम हमला: ‘मुआवजा-नौकरी सरकार का जिम्मा, मांगने नहीं जाऊंगी’ शुभम की यादों को जिंदा रखना चाहती हैं ऐशान्या

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प्रवीन मोहता, कानपुर: पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले शुभम द्विवेदी की यादें आज भी उनके परिवार और पत्नी ऐशान्या के लिए उतनी ही ताजा हैं, जितनी उस दर्दनाक दिन थीं। हमले की बरसी पर 22 अप्रैल को कानपुर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसमें न सिर्फ शुभम बल्कि पहलगाम में मारे गए सभी लोगों को नमन किया जाएगा। कार्यक्रम के जरिए ऐशान्या की कोशिश है कि शहीदों की कुर्बानी लोगों की यादों में हमेशा जिंदा रहे और पीड़ित परिवारों को न्याय मिले। ऐशान्या अपने पिता संजय के साथ कार्यक्रम की तैयारियों में जुटी हैं। ऐशान्या कहती हैं- ‘मेरा जीवन पूरी तरह बदल गया। मेरा लाइफ पार्टनर चला गया और किसी का 30 साल का बेटा। शादी के दो महीने बाद ही सब खत्म हो गया। यह दर्द शायद जिंदगी भर खत्म नहीं होगा। आज भी यकीन नहीं होता कि मेरी शादी हुई और इतनी जल्दी सब खत्म भी हो गया। मैं खुद को व्यस्त रखने की कोशिश कर रही हूं। सामाजिक कार्यों में सक्रिय होना शुरू किया है। प्रयास है कि लोग शुभम को कभी न भूलें। 22 अप्रैल को होने वाले कार्यक्रम में सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और उनके परिवारों का सम्मान होगा।’


”जो भी कोई अपनी धार्मिक पहचान बताने के बाद गोली का शिकार होता है, वह सम्‍मान का हकदार है। मेरे लिए, वह हमेशा शहीद शुभम द्विवेदी रहेंगे। परिवार अब शुभम के नाम पर एक ट्रस्‍ट बनाने की योजना बना रहा है। इस गहरे जख्‍म का भर पाना अभी बहुत दूर की बात लगती है।”

सभी पीड़ितों को शहीद का दर्जा दिया जाए’

ऐशान्या ने कहा- ‘पहलगाम में धर्म पूछ लोगों का नरसंहार हुआ था। भयावह हमले से प्रभावित कई परिवार मेरे संपर्क में हैं। किसी की पत्नी, किसी का पति तो किसी का बेटा चला गया। हमारी मांग है कि सभी पीड़ितों को शहीद का दर्जा दिया जाए। मुझे देश की बेटी कहा गया था। मुआवजा या नौकरी देना सरकार की जिम्मेदारी है। मैं मांगने नहीं जाऊंगी। हमारी सेना लगातार आतंक के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। पीएम मोदी ने मेरे ससुर से कहा था कि आतंक के खिलाफ ऑपरेशन चलता रहेगा।’


‘खौफनाक मंजर भूल पाना मुश्किल’

ऐशान्‍या के मुताबिक, आतंकवादी ने शुभम के सिर में सटाकर गोली मार दी। उनका सिर पूरा तरह से चकनाचूर हो गया। मैं उनके ठीक बगल में बैठी थी। शुभम के खून से मेरा पूरा शरीर लथपथ हो गया। वह खौफनाक मंजर आज भी मेरी आंखों से ओझल नहीं होता। वह घटना इतनी दर्दनाक है कि उसे दोबारा याद करना बहुत मुश्किल है।


‘साल भर बीत जाने के बाद भी हाथों में दिखाई देता है खून’

पहलगाम आतंकी घटना के साल भर बीत जाने के बाद भी ऐशान्‍या को अपने हाथों पर खून दिखाई देता है। उनके पति 31 वर्षीय कानपुर के व्‍यवसायी शुभम द्विवेदी परिवार के 11 सदस्‍यों के साथ पहलगाम घूमने गए थे। पांच लोग एक साथ थे जबकि छह अन्‍य लोग पहलगाम में रुक गए थे। ऐशान्‍या बताती हैं कि दोपहर का खाना खाने के बाद हम लोग एक जगह पर बैठे हुए थे। इस बीच हथियारबंद आदमी हमारे पास आया और उसने शुभम से पूछा कि तुम हिंदू हो या मुसलमान। हमें कुछ समझ में नहीं आया। उस शख्‍स ने गुस्‍से में आकर फिर वही सवाल दोहराया और हमसे कलमा पढ़ने के लिए कहा। जिस पल हमने कहा कि हम हिंदू हैं, उसने बहुत करीब से शुभम के सिर में गोली मार दी।

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