
Strait of Hormuz Iran-US Peace talks fail: अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर को लेकर वार्ता फेल होने के बाद मिडिल ईस्ट में जंग की ज्वाला और धधकने के आसार हैं. शांति वार्ता नाकाम होने के पहले से लेकर बाद तक अमेरिकी फौजों का सारा फोकस फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर है. इसे अमेरिका ने अपनी प्रतिष्ठा यानी नाक का सवाल बना लिया है. क्योंकि एक बार अमेरिका ने होर्मुज का रास्ता खोलकर अगर ईरान को ‘पैदल’ कर दिया तो बीते 45 दिनों में मिडिल ईस्ट में अमेरिका की बादशाहत को जो ठेस पहुंची है, उसकी भरपाई हो जाएगी. ऐसा हुआ तो सर्वशक्तिमान देश की प्रतिष्ठा पहले से ज्यादा बढ़ जाएगी. इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप फिर एक बार पूरे यूरोप को लपेटे में लेते हुए नाटो और यूएन जैसे संगठनों की तफरी लेकर कहेंगे, हमें तुम्हारी कोई जरूरत नहीं, अमेरिका सुपरपावर था, अमेरिका सुपरपावर है और अमेरिका सुपरपावर रहेगा.
होर्मुज को कैसे खोलेगा अमेरिका?
अमेरिका ने होर्मुज़ में बढ़ते खतरे को देखते हुए अपने दो आधुनिक युद्धपोत तैनात किए हैं. यूएस सेंट्रल कमांज (CENTCOM) की टीम वहां पर संभावित माइंस को हटाने के ऑपरेशन की तैयारी कर चुकी है. अमेरिकी नौसेना के 2 गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर USS फ्रैंक पैटर्सन और USS माइकल मर्फी होर्मुज को दोनों ओर से घेर चुके हैं. इनका मकसद पानी में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (माइंस) को ढूंढकर हटाना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये माइन ईरान से जुड़ी हो सकती हैं, जो तेल या गैस से भरे ज्वलनशील टैंकर्स को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
US माइन कैसे हटाएगा?
अपने विध्वंसक युद्धपोतों को खतरे वाले इलाके में भेजने के बजाय, अमेरिका अब हाई-टेक रोबोटिक मशीनों का इस्तेमाल करने जा रहा है, जिन्हें Unmanned Underwater Vehicles (UUVs) कहा जाता है. Mk 18 और Kingfish नाम के ये वाटर ड्रोन या माइक्रो पनडुब्बी, पानी के अंदर काफी गहराई में जाकर और सोनार तकनीक से समुद्र की सतह का नक्शा बनाकर छिपी हुई माइन ढूंढ रहे हैं.