ईसाई देश के लिए भारत में साजिश! लीबिया से इराक तक अमेरिका के लिए ‘पवित्र युद्ध’ लड़ने वाले वैनडाइक पर खतरनाक खुलासे

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नई दिल्ली/वॉशिंगटन: म्यांमार में जातीय मिलिशिया को ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग देने के आरोप में कोलकाता में भारत की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने कम से कम 7 विदेशी लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 6 यूक्रेन के नागरिक हैं और एक अमेरिका का कहने वाला है। अमेरकी नागरिक का नाम मैथ्यू एरॉन वैनडाइक है जिसके बारे में कई बड़े और सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। ये अमेरिका की तरफ से ईसाई देश बनाने के लिए ‘पवित्र युद्ध’ लड़ रहा था। मैथ्यू एरॉन वैनडाइक ने गिरफ्तारी से कुछ महीने पहले अपने एक दोस्त को मैसेज भेजा था जिसमें उसने उसे म्यांमार चलने के लिए कहा था।

वैनडाइक ने एक टेक्स्ट मैसेज में अपने दोस्त से कहा था कि काचिन और चिन लोग ‘ईसाई धर्म को लेकर सचमुच गंभीर’ लग रहे थे और ‘ज्यादातर बौद्ध सैन्य जुंटा’ से लड़ रहे थे। अमेरिकी पादरी डॉ. विलियम डेवलिन भी वैनडाइक के संपर्क में थे उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा है कि ‘उन्हें पता था कि वैनडाइक म्यांमार में हैं और उसकी गिरफ्तारी की खबर सुनकर उन्हें कोई हैरानी नहीं हुई।’ उन्होंने कहा कि ‘मुझे पता था कि वह वहां (म्यांमार) है। मुझे पूरी तरह से यकीन नहीं था कि वह क्या कर रहा है। उसने बस यूं ही जिक्र किया था कि वह म्यांमार में लोगों को ट्रेनिंग दे रहा है।’

लीबिया और सीरिया के बाद म्यांमार में ‘धर्म युद्ध’

खुलासा हुआ है कि वैनडाइक और उनके संगठन ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ यानि SOLI ने पिछले एक दशक का ज्यादातर समय युद्ध क्षेत्रों में बिताया है। उसने इराक में ईसाइयों को ISIS के खिलाफ लड़ने की ट्रेनिंग दी थी। इसके अलावा ये यूक्रेन भी जा चुका है जहां उसने यूक्रेनी नागरिकों को रूसी सैनिकों के खिलाफ लड़ने की ट्रेनिंग दी थी। वो खुद को एक क्रांतिकारी कहता है। एचटी ने वैनडाइक के सहयोगियों जैसे पादरी डेवलिन और उसके कई जानने वावे लोगों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वैनडाइक अपने संगठन SOLI को एक सामान्य NGO नहीं, बल्कि लड़ाई के दौरान मदद करने वाला एक चैरिटी संगठन कहता है।


जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से उसने ग्रेजुएशन की है जो अमेरिका की विदेश नीति और खुफिया विभाग के दिग्गजों के प्रशिक्षण का केंद्र है। वैनडाइक ने एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता के तौर पर पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका की यात्रा करते हुए कई साल बिताए हैं। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि उसके अमेरिका की खुफिया एजेंसियों से काफी गहरे संपर्क हैं। उसका संगठन SOLI दुनिया भर के ईसाइयों को बचाने की कोशिश करता है जिन्हें अलग अलग युद्ध के मैदान में निशाना बनाने की कोशिश की जाती है। इनका कहना है कि ये लोग भाड़े के सैनिक नहीं हैं और ये किसी सरकार से पैसा नहीं लेते बल्कि आम लोगों से डोनेशन मांगते हैं। उस पैसे का इस्तेमाल वे उन समूहों को सैन्य ट्रेनिंग, बॉडी आर्मर और संचार उपकरण देने के लिए करते हैं।

सीरिया, लीबिया और यूक्रेन होते हुए म्यांमार का सफर

वैनडाइक को साल 2011 में लीबिया में गिरफ्तार किया गया था जब वो गद्दाफी के शासन के खिलाफ लड़ने लीबिया पहुंचा था। वो करीब 6 महीने जेल में रहा और बाद में अबू सलीम जेल से फरार हो गया। गद्दाफी की सरकार के पतन के बाद जब वो लीबिया से अमेरिका के लिए फ्लाइट में सवार हो रहा था उस दौरान वो काफी प्रसिद्ध हो गया। वो कई न्यूज चैनलों पर दिखाई देने लगा था। उसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों पर एक विशेषज्ञ के तौर पर बुलाया जाने लगा। उसके बाद वो इराक गया और वहां के असीरियन ईसाई समुदायों को ISIS के खिलाफ लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया। उसने करीब 300 लोगों को ट्रेनिंग दी थी। 2022 में वो यूक्रेन चला गया और अब उसे कोलकाता से NIA ने गिरफ्तार किया है।

ईसाई अल्पसंख्यकों के लिए ‘धर्मयुद्ध’

वैनडाइक और उसके समर्थकों का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में सताए जा रहे ईसाइयों की मदद करना है। म्यांमार में वो ‘काचिन’ और ‘चिन’ समुदायों की मदद कर रहा था जो “बौद्ध सैन्य जुंटा” के खिलाफ लड़ रहे हैं। उसके डोनेशन का एक बड़ा हिस्सा उन अमेरिकियों से आता है जो ईसाई उत्पीड़न को लेकर चिंतित रहते हैं। इराक में उसने एक बार दावा किया था कि उन्हें अमेरिकी विदेश विभाग की अनुमति है, लेकिन राजनयिकों ने इसका खंडन किया था।एक्सपर्ट्स का मानना है कि वैनडाइक अमेरिकी खुफिया विभाग के करीब माने जाने वाले जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं लेकिन उनके पास संसाधनों की इतनी कमी रहती है कि वे अमेरिकी सरकार के आधिकारिक एजेंट नहीं लगते बल्कि एक स्वतंत्र ‘क्रांतिकारी’ की तरह काम करते हैं। हालांकि नवभारत टाइम्स इसकी पुष्ट नहीं करता है कि वैनडाइक असलियत में कौन है और NIA की तफ्तीश में उसके चेहरे से नकाब हट जाएगा।

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