
नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध-प्रदर्शन के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की मांग वाली PIL पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। सीजेपी की तरफ से कल (6 जून) को जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन के आयोजन का आह्वान किया गया है। इस संबंध में रोकथाम, नियमन और भीड़-नियंत्रण के उपाय करने के निर्देश मांगने वाली याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में दायर की गई थी जिस पर उसने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।
तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार
NGO ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ की ओर से दायर याचिका पर जस्टिस सौरभ बनर्जी और जस्टिस अमित शर्मा की वेकेशन बेंच के सामने तत्काल सुनवाई के लिए जिक्र किया गया। हालांकि, कोर्ट ने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।
कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ याचिका बेअसर
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक यह याचिका ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ नाम के एक संगठन ने दायर की थी। दिल्ली हाई कोर्ट का कहना है कि दोनों पक्षों के वकीलों का कहना है कि सिंगल जज द्वारा रिट याचिकाओं को खारिज किए जाने के बाद ये अपीलें बेअसर हो गई हैं। इन हालात में, इन रिट अपीलों को बेअसर मानकर खारिज किया जाता है, और भविष्य के मामलों में विचार के लिए कानून से जुड़ा सवाल खुला रखा जाता है।
कैसे बनी कॉकरोच जनता पार्टी?
- कॉकरोच आंदोलन की शुरुआत 15 मई को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान हुई, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने बेरोज़गार युवाओं के सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज़्म की ओर बढ़ने पर चिंता जताई थी।
- CJI सूर्यकांत ने अपनी मौखिक टिप्पणी में कहा कि ऐसे युवा समाज में कॉकरोच की तरह परजीवी बन रहे हैं। बाद में CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि उनका इशारा उन लोगों की ओर था जिनके पास फर्जी डिग्रियां हैं और जो ऐसी गतिविधियों में शामिल होते हैं।
- सीजेपी की शुरुआत अमेरिका के बोस्टन में रहने वाले अभिजीत दिपके ने की थी। यह बेरोजगारी, संस्थागत जवाबदेही और मीडिया की आजादी जैसे मुद्दों पर टिप्पणी करने के लिए राजनीतिक व्यंग्य का इस्तेमाल करता है।
- इसने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) से जुड़े प्रश्न-पत्र लीक और CBSE बोर्ड परीक्षा से जुड़े विवादों के विरोध में 6 जून को जंतर-मंतर पर एक सभा बुलाने का आह्वान किया है। सीजेपी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है।