
Iran Oil India: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान भारत को एक बड़ी राहत मिली है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरानी तेल पर अस्थायी छूट दे दी है. इससे भारतीय रिफाइनरों के लिए आयात फिर से शुरू करने का रास्ता खुल गया है. ऐसे समय में जब वैश्विक ऊर्जा संकट की वजह से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है यह कदम भारत की तेल खरीद रणनीति पर एक गहरा असर डाल सकता है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरानी तेल रूस और सऊदी अरब से मिलने वाले तेल से सस्ता होगा या नहीं? आइए जानते हैं.
ईरान की एक बड़ी कोशिश
ईरान अपने खोए हुए बाजार हिस्से को वापस पाने की पूरी कोशिश कर रहा है. इस मामले में कीमत उसकी सबसे बड़ी ताकत है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान भारत जैसे खरीदारों को आकर्षित करने के लिए भारी छूट दे रहा है. तैरते हुए भंडारों में लगभग 170 मिलियन बैरल कच्चा तेल जमा होने की वजह से तेहरान पर इसे जल्द से जल्द बेचने का दबाव है. इस जल्दबाजी की वजह से ईरानी तेल की कीमत काफी कॉम्पिटेटिव होने की उम्मीद है. यह कीमत रूसी कच्चे तेल जितनी सस्ती या उससे भी सस्ती हो सकती है.
रूस से कम हो रहा फायदा
पिछले दो सालों में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है. इसकी वजह भारी छूट है. लेकिन अब यह फायदा कम होता जा रहा है. 2026 की शुरुआत में रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट में भारी गिरावट आई है. पहले यह लगभग $10 से $13 प्रति बैरल थी. अब यह घटकर सिर्फ $4 से $5 रह गई है. साथ ही बैन, बीमा संबंधी बाधाएं और लंबे समुद्री रास्ते जैसी लॉजिस्टिक चुनौतियां इंपोर्ट की कुल लागत को बढ़ा रही हैं.
सऊदी अरब से कितना फायदा?
सऊदी अरब भारत के लिए एक स्थिर और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. लेकिन इसकी एक कीमत चुकानी पड़ती है. सऊदी कच्चा तेल आमतौर पर बिना किसी भारी छूट के आधिकारिक दरों पर बेचा जाता है. इससे यह रूसी या ईरानी तेल की तुलना में 7% से 12% ज्यादा महंगा हो जाता है. हालांकि इसकी आपूर्ति लगातार बनी रहती है और भू राजनीतिक रूप से सुरक्षित है.
ईरान भारत के ज्यादा करीब
कीमत को तय करने में भूगोल की एक बड़ी भूमिका होती है. ईरान भारत के ज्यादा करीब है. इस वजह से रूस की तुलना में माल ढुलाई का समय और लागत काफी कम हो जाती है. रूस से तेल लाने में काफी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. परिवहन लागत कम होने का मतलब है भारत के लिए ज्यादा बचत. इस वजह से ईरानी तेल आर्थिक रूप से और भी ज्यादा फायदेमंद बन जाता है.
इसी के साथ ईरान से इंपोर्ट करने का एक और फायदा है. दरअसल यहां पेमेंट के दूसरे तरीके इस्तेमाल किए जा सकते हैं. यानी कि रुपया रियाल सिस्टम. इससे भारत लेन-देन के लिए यूनाइटेड स्टेट्स डॉलर पर अपनी निर्भरता को कम कर पाएगा.