
वॉशिंगटन: भारत में काम कर चुके अमेरिका के पूर्व राजदूत केनेथ जस्टर ने कहा है कि ‘पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन से अच्छे संबंध बनाए हैं इसलिए भविष्य में होने वाले किसी आतंकी घटना के बाद भारत के लिए ऑपरेशन सिंदूर 2 करना आसान नहीं होगा।’ उन्होंने वॉशिंगटन डीसी में हडसन इंस्टीट्यूट में बोलते हुए कहा ‘ट्रंप प्रशासन को अपने पक्ष में करने में पाकिस्तान की सफलता, जो अब अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाने तक पहुंच गई है, जाहिर है कई स्तरों पर और कई कारणों से भारत के लिए एक परेशानी का सबब है।’
उन्होंने आगे कहा ‘और हममें से कई लोगों के लिए हैरानी की बात है… अमेरिका के साथ पाकिस्तान के अच्छे संबंधों के कारण भारत शायद अगली किसी बड़ी सीमा-पार आतंकवादी घटना पर अपनी प्रतिक्रिया को सीमित रखे। कम से कम पिछली अन्य घटनाओं के विपरीत। और मैं उस समय राजदूत था जब पुलवामा और बालाकोट की घटनाएं हुई थीं। अब भारत को शायद इस बात पर संदेह हो कि क्या अमेरिका, पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों के खिलाफ किसी कड़े जवाबी कदम का समर्थन करेगा।’
‘भारत के लिए ऑपरेशन सिंदूर 2 आसान नहीं’
केनेथ जस्टर ने आगे कहा ‘बेशक, पिछले 26 वर्षों से सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों में अमेरिका-भारत संबंधों से जुड़े एक व्यक्ति के तौर पर मुझे उम्मीद है कि हम अपने द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह से पटरी पर वापस ले आएंगे, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे के लिए सचमुच फायदेमंद साझेदारी बनाने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे। भारत की विशाल आबादी, उसके बाजार के आकार, उसकी तकनीकी प्रतिभा और उसकी बढ़ती सैन्य शक्ति को देखते हुए, उसका उदय इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक कहानियों में से एक होगा। मेरी नजर में यह अमेरिका और भारत, दोनों के ही हित में है कि अमेरिका उस कहानी का एक सकारात्मक हिस्सा बने।’
केनेथ जस्टर ने आगे कहा ‘बेशक, पिछले 26 वर्षों से सार्वजनिक और निजी, दोनों क्षेत्रों में अमेरिका-भारत संबंधों से जुड़े एक व्यक्ति के तौर पर मुझे उम्मीद है कि हम अपने द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह से पटरी पर वापस ले आएंगे, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे के लिए सचमुच फायदेमंद साझेदारी बनाने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे। भारत की विशाल आबादी, उसके बाजार के आकार, उसकी तकनीकी प्रतिभा और उसकी बढ़ती सैन्य शक्ति को देखते हुए, उसका उदय इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक कहानियों में से एक होगा। मेरी नजर में यह अमेरिका और भारत, दोनों के ही हित में है कि अमेरिका उस कहानी का एक सकारात्मक हिस्सा बने।’इसी कार्यक्रम में बोलते हुए अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट एम कैंपबेल ने गुरुवार को कहा कि QUAD ग्रुपिंग के पीछे भारत ही मुख्य शक्ति था और उन्होंने चारों देशों के बीच साझेदारी को आकार देने में भारत की अहम भूमिका पर जोर दिया। हडसन इंस्टीट्यूट में बोलते हुए कैंपबेल ने कहा ‘…हमें यह मानना होगा कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान प्रशासन के अहम लोगों ने यह फैसला किया था कि ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल’ पर जब भारत के सामने सचमुच का खतरा था तब भारतीय दोस्तों को तुरंत जानकारी, इंटेलिजेंस और दूसरी चीजें मुहैया कराई जाएं।”
‘ट्रंप ने पहले कार्यकाल के दौरान की थी मदद’
उन्होंने आगे कहा “मैं वहां मौजूद था और मैंने जो भी रिपोर्टें देखीं, उनके बावजूद राष्ट्रपति बाइडन ने एक घंटे से ज्यादा समय तक, क्वाड में लीडर लेवल पर शामिल होने के लिए, शुरू में हिचकिचा रहे प्रधानमंत्री मोदी को मनाया। सच कहूं तो उन्होंने मोदी से इस बात पर इतनी बहस की कि आखिरकार मोदी को कहना पड़ा ‘मैं वादा करता हूं कि मैं ऐसा करूंगा, बस आप मुझ पर जोर डालना बंद कर दीजिए’… क्वाड में पर्दे के पीछे से अगुवाई करने वाला देश अमेरिका नहीं था। वह ऑस्ट्रेलिया नहीं था। वह जापान नहीं था। वह भारत था।”