
भारत में हो रही BRICS देशों की बैठक के बाद रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने मीडिया को ब्रीफ करते हुए बताया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के इस मौजूदा संकट को खत्म करना सबसे ज्यादा जरूरी है. उन्होंने बताया कि इस बैठक में इसी मुद्दे पर चर्चा हुई. लावरोव के बयान का अनुवाद करते हुए अनुवादक ने बताया कि BRICS को किसी औपचारिक मध्यस्थ संगठन की भूमिका नहीं निभानी चाहिए.
हालांकि, BRICS के सदस्य देश अपने-अपने स्तर पर क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए अहम योगदान दे सकते हैं. उन्होंने संकेत दिया कि संगठन के कई सदस्य देशों के पास तनाव कम करने और संवाद को आगे बढ़ाने की क्षमता है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की अहम भूमिका की ओर इशारा किया है. उन्होंने कहा कि BRICS के कई सदस्य देश, खासकर भारत, इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में गहरी दिलचस्पी रखते हैं, क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरतें सीधे तौर पर पश्चिम एशिया पर निर्भर हैं.
भारत के कूटनीतिक प्रभाव से ईरान और UAE को मेज पर ला सकते हैं
लावरोव ने कहा कि भारत जैसे देशों के पास ऐसा कूटनीतिक प्रभाव है, जिसके जरिए ईरान और UAE को बातचीत की मेज पर लाया जा सकता है. उनका मानना है कि अगर क्षेत्रीय ताकतें संवाद के रास्ते को मजबूत करें, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और किसी बड़े टकराव की आशंका को टाला जा सकता है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि BRICS एक संगठन के तौर पर मध्यस्थ की भूमिका न निभाए, लेकिन उसके सदस्य देश अलग-अलग स्तर पर शांति बहाली में रचनात्मक योगदान दे सकते हैं. खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा दुनिया के लिए बेहद संवेदनशील है, क्योंकि वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है.
होर्मुज में बढ़ा तनाव तो पूरी दुनिया में पड़ेगा प्रभाव
रूस का मानना है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बढ़ती अस्थिरता केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन सकती है. मॉस्को के मुताबिक यदि यहां तनाव और बढ़ा, तो दुनिया भर में तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा. यही वजह है कि रूस लगातार इस मुद्दे के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने पर जोर दे रहा है.
होर्मुज में बढ़ा तनाव तो पूरी दुनिया में पड़ेगा प्रभाव
रूस का मानना है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में बढ़ती अस्थिरता केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन सकती है. मॉस्को के मुताबिक यदि यहां तनाव और बढ़ा, तो दुनिया भर में तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा. यही वजह है कि रूस लगातार इस मुद्दे के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने पर जोर दे रहा है.