
दुनिया को आशंका थी कि अमेरिका मंगलवार की रात ईरान में ‘मदर ऑफ ऑल बम’ गिरा सकता है. यह 10,000 किलो का अमेरिकी सेना का सबसे पावरफुल जीपीएस गाइडेड नॉन-न्यूक्लियर हथियार है. ट्रंप ने खुलेआम एलान कर रखा था कि एक रात में ईरान को बर्बाद कर देंगे. इजरायल भी ईरानियों को चेतावनी दे चुका था. हालांकि, सुबह होते-होते ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ करने लगे. अमेरिका बोला कि 2 हफ्ते के लिए युद्धविराम हो गया है. ईरानी मिनिस्टर ने यह भी कह दिया है कि दो हफ्ते के लिए हमारी सेना होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित रास्ता देना सुनिश्चित करेगी. असल में, पब्लिक में यही पता चला है, लेकिन रातोंरात अलग ही खेल हुआ. पाकिस्तान भले ही ‘चौधरी’ बन रहा है, लेकिन अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा है कि यह महायुद्ध किसी और देश के हस्तक्षेप पर रुका है.
यह भी समझना चाहिए कि रातोंरात कई देशों के कूटनीतिक प्रयास तेज करने की वजह ट्रंप की वो चेतावनी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर कमर्शियल जहाजों को गुजरने नहीं दिया, तो वह ईरान की पूरी सभ्यता मिटा देंगे. एक लाइन की यह धमकी अपने आप में बहुत बड़ी थी. इसके बाद अमेरिका में विपक्ष ट्रंप पर हमलावर हो गया और दुनिया के कई देश गंभीर हो गए. ईरान से बातचीत होने लगी.
पाकिस्तान नहीं, तो कौन?
तीन ईरानी अधिकारियों के हवाले से NYT की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने कूटनीतिक प्रयास जरूर किए, लेकिन इस समझौते में ईरान के एक प्रमुख सहयोगी का अहम रोल रहा. जी हां, परदे के पीछे से चीन ने आखिरी समय में हस्तक्षेप किया था. इसके बाद ईरान ने पाकिस्तान के युद्धविराम प्रस्ताव को स्वीकार किया. वैसे भी ‘चाचा चौधरी’ शहबाज शरीफ कई हफ्ते से मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इजरायल के साथ-साथ खुद ईरान तैयार नहीं था. असल में चीन के कहने पर ईरान राजी हुआ है. उसने कहा है कि अमेरिका ने हमारी शर्तों को स्वीकार कर लिया है. ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने आधिकारिक तौर पर इस समझौते की पुष्टि कर दी है और इसे एक जीत के रूप में पेश किया है.
परदे के पीछे से चीन क्यों आया?
वास्तव में, ईरान युद्ध से अब चीन भी प्रभावित होने लगा था. उसे मुख्य रूप से तेल आपूर्ति ईरान से ही होती है, जो बाधित हो गई थी. कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक मांग में कमी के कारण चीन अब आर्थिक दबाव झेल रहा था. ईरान के खार्ग आइलैंड पर अमेरिकी हमले से चीन के लिए ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा होने वाली थी. शिपिंग लागत बढ़ने से चीनी कारखानों को नुकसान होने लगा था. यही वजह है कि पाकिस्तान के युद्धविराम में फेल होने के बाद सीन में चीन की एंट्री हुई.
आर्थिक मंदी के खतरे से उबरने, ऊर्जा आपूर्ति को बहाल करने, होर्मुज रूट ब्लॉक होने से माल ढुलाई में देरी और व्यापार में कमी को रोकने के लिए चीन के लिए महायुद्ध का रुकना जरूरी हो गया था.
उधर, ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए युद्धविराम की घोषणा की. इससे पहले, पाकिस्तान ने आग्रह किया था कि दोनों पक्ष दो हफ्ते के लिए युद्धविराम का पालन करें और इस दौरान होर्मुज से जहाजों का आना-जाना जारी रहे. ईरान ने भी एक ‘If’ लगाकर कहा है कि अगर ईरान के खिलाफ हमले रोक दिए गए हैं, तो हमारी ताकतवर आर्म्ड फोर्सेज अपने डिफेंसिव ऑपरेशन बंद कर देगी.