क सांसद का काफिला गुजर रहा है, तभी उस पर पत्थर बरसने लगते हैं, उसके बाद पेट्रोल बम फेंका जाता और फिर गोलीबारी शुरू हो जाती है. इसके बाद सांसद के सुरक्षाकर्मी जवाबी फायरिंग करते हैं. एक आईपीएस अधिकारी हालात को संभालने और हमलावरों को खदेड़ने के लिए AK-47 राइफल लेकर हेलिकॉप्टर से घटनास्थल पर पहुंचता है और सांसद को वहां से सुरक्षित निकाल लेता जाता है…
यह सुनने में किसी हिन्दीभाषी राज्य पर आधारित ओटीटी शो की कहानी लग सकती है, लेकिन यह सारी घटनाएं बिल्कुल सच्ची हैं. यह पूरा वाकया वर्ष 2008 का है, जब गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ पर कथित रूप से मुख्तार अंसारी के गैंग ने हमला कर दिया था. उस हमले में योगी आदित्यनाथ बाल-बाल बच गए थे.
IPS अधिकारी को किया गया एयरड्रॉप
गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी की मौत के बाद इस तरह के कई प्रकरणों की यादें ताजा हो रही हैं. रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी बृजलाल ने 7 सितंबर, 2008 को आज़मगढ़ में आदित्यनाथ के काफिले पर हुए हमले का पूरा विवरण सुनाया. बृजलाल तब यूपी में एडीजी कानून और व्यवस्था के पद पर थे. 1977 बैच के इस अधिकारी ने बताया कि उन्हें एके-47 राइफल के साथ हेलिकॉप्टर से एयरड्रॉप करना पड़ा था. इस हमले में योगी आदित्यनाथ तो किसी तरह बाल-बाल बच गए, लेकिन एक व्यक्ति की मौत हो गई और छह अन्य घायल हो गए थे.
बृज लाल के मुताबिक, दुश्मनी की यह कहानी 2005 से शुरू होती है, जब मऊ में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे. उन्होंने कहा, ‘इस दौरान पांच बार के विधायक और माफिया से नेता बने मुख्तार का नाम मऊ में दंगा भड़काने के लिए सामने आया था. उन्हें खुली जीप से एके-47 लहराते देखा गया.’
योगी आदित्यनाथ, जो उस समय गोरखपुर के सांसद थे, खुद मऊ के लिए रवाना हुए, लेकिन उन्हें जिले में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई. दोहरीघाट पर उन्हें रोककर वापस गोरखपुर भेज दिया गया. तब समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे.