इधर ईरान को घेर रहा इजरायल, वहां खामेनेई ने E3 संग कर दिया खेल! बनाया ट्रंप के योजना को पंचर करने का प्‍लान?

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एक तरफ इजरायल और ईरान एक दूसरे पर लगातार बम गिरा रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ ईरान के सवोच्‍च नेता खामेनेई ने डोनाल्‍ड ट्रंप के प्‍लान को पंचर करने की योजना पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है. डोनाल्‍ड ट्रंप बार-बार ईरान पर बिना शर्त सरेंडर करने का दबाव बना रहे हैं. साफ कह दिया गया है कि अगर खामेनेई नहीं माने तो अमेरिका खुद भी इस युद्ध में उतर सकता है. इसी बीच यह खबर सामने आ रही है कि ईरान ने ई3 देश यानी जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन को अप्रोच किया है. यह पूरी योजना ट्रंप की अधिकतम दबाव वाली नीति को न्‍यूट्रलाइज करने के लिए बनाई जा रही है.

ईरान के विदेश मंत्री करेंगे बैठक

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास के साथ जिनेवा में बैठक होने जा रही है. मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक कूटनीति के लिए इन बैठकों को काफी अहम माना जा रहा है. इस बात की आशंका जताई जा रही है कि इराक की तर्ज पर ही अमेरिका ईरान को भी पूरी तरह से तबाह करने की योजना बनाए बैठा है. ऐसे में यूरोप के देशों संग बैठक कर ईरान डोनाल्‍ड ट्रंप की काट ढूंढने में लगे हैं.यूरोप, विशेष रूप से ई3 (जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन), लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के पक्षधर रहे हैं. वे 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) को पुनर्जनन की दिशा में काम करना चाहते हैं. डोनाल्‍ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान साल 2018 में इस समझौते करे रद्द कर दिया था. जिसके बाद ईरान ने तेजी से अपने परमाणु कार्यक्रम पर काम करना शुर कर दिया. अब ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान नए सिरे से अपनी शर्तों पर ईरान के साथ न्‍यूक्लियर डील करना चाहते हैं. जिसके लिए ईरान तैयार नहीं है.अराघची ने बार-बार कहा है कि ईरान कूटनीति के लिए तैयार है, बशर्ते यह “पारस्परिक सम्मान” पर आधारित हो. जिनेवा में होने वाली यह बैठक यूरोप की मध्यस्थता की भूमिका को मजबूत करने का प्रयास है, विशेष रूप से तब जब अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में प्रस्तावित वार्ता इजरायल के हमलों के कारण रद्द हो गई थी. ट्रंप की नीति इस वार्ता के लिए एक जटिल कारक है. उनकी “अधिकतम दबाव” नीति और इजरायल के प्रति मजबूत समर्थन ने ईरान को सतर्क कर दिया है. ट्रंप ने एक ओर कूटनीति की बात की, तो दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई की धमकी दी, जिससे ईरान को लगता है कि इजरायल अमेरिका की शह पर हमले कर रहा है.

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