मिडिल ईस्ट के देश इराक में कट्टरपंथ हदें पार करते हुए बच्चियों पर कहर बरपाने की तैयारी में है. इराक की संसद में महिलाओं और बच्चों के शोषण को कानूनी जामा पहनाने की तैयारी की जा रही है. इराक 60 साल से भी ज्यादा पुराने अपने कानून में बदलाव कर निकाह के लिए लड़कियों की कानूनी उम्र 18 साल और 15 साल से घटाकर महज 9 साल कर सकता है. इसके विरोध में पूरी दुनिया से आवाज उठी है.
मिडिल ईस्ट आई के मुताबिक, इराक में प्रोग्रेसिव लेफ्टिस्ट के तौर पर प्रशासनिक बदलावों के लिए मशहूर अब्दुल करीम कासिम की सरकार ने साल 1959 में पर्सनल स्टेटस लॉ बनाया था. इस कानून के तहक 18 साल की उम्र पूरी होने के बाद ही लड़कियों की शादी की जा सकती है. उस दौर में पूरे मिडिल ईस्ट में इसे सबसे बढ़िया कानूनों में माना गया था. पर्सनल स्टेटस लॉ 1959 के 188 नियम में तय उम्र में शादी के अलावा पुरुष की मनमर्जी से दूसरी शादी पर रोक भी लगाई गई है.
हालांकि, मुस्लिम पुरुष और गैर-मुस्लिम महिला अगर शादी करना चाहें तो उनके लिए कोई शर्त या प्री-कंडीशन लागू नहीं होगी. कट्टर मुस्लिम आबादी की खुशी के लिए नियम में यह ढील दी गई थी कि अगर परिवार और काजी यानी जज की इजाजत हो तो 15 साल की उम्र में भी निकाह किया जा सकता है. अब इन्हीं कानूनों में बदलाव कर लड़की की शादी की उम्र घटाकर 9 साल किए जाने का प्रस्ताव पेश किया गया है.
इराक में कानून में विवादित बदलाव के पीछे कौन सी ताकत है?
इराक में शिया मुसलमानों की बहुतायत है. इसलिए शिया-बहुल इराक की सरकार में शिया पार्टियां ही सबसे ताकतवर भूमिका में होती है. अक्सर वही सभी बड़े फैसले लेते रहे हैं. इन्हीं शिया इस्लामिस्ट पार्टियों ने मिलकर एक कानूनी ढांचा तैयार किया है. इसी फ्रेमवर्क में लड़कियों की शादी की उम्र कम करने वाले विवादित बदलाव की बात भी शामिल है. फिलहाल इराक में शिया पार्टियों के समर्थन से शिया फिरके को मानने वाले मोहम्मद शिया अल-सुदानी की सरकार है.
कानून में प्रस्तावित बदलावों के पीछे शिया पार्टियों की बेतुकी दलीलें
कानून में प्रस्तावित बदलावों के पीछे शिया पार्टियों ने बेतुकी दलीलें दी हैं. उसने कहा है कि संविधान के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश में पर्सनल स्टेटस लॉ 1959 में बदलाव की पेशकश की गई है. नया कानून बनने से इराकी परिवार खुद तय कर सकेंगे कि उन्हें कब अपने बच्चों को शादी करवानी है. क्योंकि इंटरनेशनल एनजीओ गर्ल्स नॉट ब्राइड्स के मुताबिक, मौजूदा कानून के बावजूद इराक में 7 फीसदी बच्चियों की शादी 15 साल की उम्र से पहले और 28 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल उम्र होने से पहले कर दी जाती है.
कानून में बदलाव के लिए प्रस्तावित विधेयक में और क्या-क्या है?
इराक की संसद में मौजूदा कानून में बदलाव के लिए प्रस्तावित विधेयक में कहा गया है कि व्यक्तिगत मामलों के कानूनी निपटारे के लिए पति और पत्नी को सुन्नी या शिया में से एक धर्म चुनना होगा. अगर शादी के कॉन्ट्रैक्ट के लिए किस धर्म का पालन करना है जैसा कोई विवाद हो तो समझौते को पति के धर्म के मुताबिक ही माना जाएगा. विधेयक में साफ तौर पर कहा गया है कि शिया कानून उस जाफरी न्याय व्यवस्था के आधार पर होगा, जो शादी, तलाक, बच्चे गोद लेना और विरासत जैसे पर्सनल मामले को देखता है.
जाफरी कानून में कई विवादास्पद नियम, महिलाओं पर पाबंदियां
छठे शिया इमाम जाफ़र अल सादिक के नाम पर बने इस जाफरी कानून के तहत 9 साल की लड़की और 15 साल के लड़कों की शादी जायज है. चौंकाने वाली बात यह है कि इस कानून के पुराने संस्करण के मुताबिक मुस्लिम पुरुषों को गैर-मुस्लिम महिलाओं से शादी करने पर रोक, लेकिन मैरिटल रेप को जायज माना जाता था. इसमें शौहर की इजाजत के बिना बीवी के घर से बाहर निकलने पर भी रोक थी. इसके अलावा भी इस कानून में महिलाओं को लेकर कई विवादास्पद मजहबी पाबंदियां हैं.