मेलबर्न: कुख्यात आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट या ISIS की सदस्य रहीं महिलाओं की घर वापसी की गुहार को सरकारें नजरअंदाज कर रही हैं। सरकारों के इस रवैये ने मानवाधिकार और अंंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने का काम किया है। इस्लामिक स्टेट आतंकवादी समूह की स्वघोषित ‘खिलाफत’ सीरियाई गृहयुद्ध और इराकी इस्लामी विद्रोह से उभरी थी। एक समय सीरिया एवं इराक में इसका दबदबा था और इससे तुर्किये की सीमा को भी खतरा था, लेकिन 5 साल के भीतर इन क्षेत्रों पर उसने अपना कब्जा गंवा दिया। सीरिया और इराक में ISIS की खिलाफत से 40,000 से ज्यादा विदेशी सदस्य जुड़े, जिनमें से लगभग 10 प्रतिशत महिलाएं थीं।
इस्लामिक स्टेट में महिलाओं का शामिल होना हैरान कर देने वाली घटना थी क्योंकि यह पहली बार था जब हजारों महिलाएं विदेश में किसी आतंकवादी गुट में शामिल हुईं। नारीवादी शोधकर्ता पिछले एक दशक से ISIS में महिलाओं की भागीदारी और अनुभवों की बारीकियों का विश्लेषण कर रहे हैं कि वे इस कुख्यात आतंकी संगठन में क्यों और कैसे शामिल हुईं। बता दें कि इस्लामिक स्टेट से जुड़ने वाली उन विदेशी महिलाओं (और बच्चों) पर बहुत कम ध्यान दिया गया है, जो अब भी सीरिया और इराक में हैं। उनकी वापसी और पुनर्वास आदि की जरूरत पर भी ध्यान नहीं दिया गया है। कैंपों में रह रहीं और वापस आ चुकीं, दोनों ही तरह की महिलाओं के भविष्य के बारे में कुछ निश्चित नहीं है।
सीरिया के उत्तर पूर्व में ‘उत्तर और पूर्वी सीरिया का स्वायत्त प्रशासन’ है, जहां अल-होल और अल-रोज कैंप हैं। वहां सीरियाई संघर्ष से विस्थापित हुए हजारों लोग रहते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं एवं बच्चे शामिल हैं। इनमें रूस, ब्रिटेन और चीन सहित 50 से अधिक देशों की ISIS से जुड़ी कई ऐसी महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जिन्हें कैंप की बाकी आबादी से अलग एक कैंपस में बंदी बनाकर रखा गया है। शिविरों में स्थिति बहुत खराब है और उनके साथ किए जाने वाले व्यवहार की तुलना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यातना से की गई है। कई रिपोर्ट और विवरण बताते हैं कि इस अनिश्चितकालीन कैद के घातक, दीर्घकालिक परिणाम हैं।
सीरिया के उत्तर पूर्व में स्थित इन कैंपों में न केवल ISIS से जुड़ी महिलाओं और बच्चों को हिरासत में रखा जाता है, बल्कि यजीदी समुदाय की महिलाओं समेत ISIS की पीड़िताओं को भी वहीं रखा जाता है। खास बात यह है कि इन शिविरों में रहने वाले अधिकतर लोग इराकी और सीरियाई परिवारों से संबंध रखते हैं। यह ‘उत्तर और पूर्वी सीरिया के स्वायत्त प्रशासन’ के दबाव को कम करने के लिए विदेशियों को वापस भेजने, उनके पुनर्वास आदि की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है। कुछ सरकारों ने हालांकि अपने नागरिकों को वापस लाने के अपने प्रयासों को बढ़ा दिया है, लेकिन विशेष रूप से महिलाओं के पुनर्वास कार्यक्रमों पर बहुत कम शोध किया गया है।