भारत के इस घातक हथियार का मुरीद हुआ अर्मेनिया, बेड़े में और शामिल करने की कर रहा तैयारी

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भारत के बनाए हथियार अब दुनिया में अपनी जगह बना रहे हैं. डिफेंस सूत्रों के मुताबिक अर्मेनिया ने भारत से 12 ATAGS तोपें खरीदने के बाद अब 80 और तोपें मंगवाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसे लेकर बातचीत भी तेज कर दी गई है. ATAGS तोप को DRDO और निजी कंपनियों जैसे टाटा और कल्याणी ग्रुप ने मिलकर तैयार किया है. यह 155mm/52 कैलिबर की तोप है, जिसने टेस्ट में करीब 48 किलोमीटर तक फायर कर नया रिकॉर्ड बनाया था. इसकी मारक क्षमता कई विदेशी तोपों से ज्यादा मानी जा रही है.

अर्मेनिया का यह कदम अजरबैजान के साथ चल रहे तनाव के बीच बेहद अहम माना जा रहा है. भारत ने 2024 में अर्मेनिया के साथ एक नया रक्षा समझौता भी किया था. भारत के लिए यह सौदा इसलिए भी बड़ी बात है, क्योंकि अब वह सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि हथियार बेचने वाला भी बन गया है. पिछले साल भारत का रक्षा निर्यात 2.5 अरब डॉलर तक पहुंचा, जबकि भारत ने बीते 20 सालों में रूस से करीब 60 अरब डॉलर के हथियार खरीदे हैं. अब भारत मेक इन इंडिया के तहत खुद के हथियार बना कर दुनिया को बेच रहा है.

ATAGS तोप की खासियत क्या है?

ATAGS का पूरा नाम एडवांस टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम (Advanced Towed Artillery Gun System) है. यह एक 155mm/52-कैलिबर की आधुनिक तोप है, इसकी कई खूबियां हैं, जिसकी वजह से अर्मेनिया इसे बड़ी संख्या में अपने बेड़े में शामिल करना चाहता है.

ATAGS की रेंज करीब 48 किलोमीटर तक है, जो दुनिया की कई तोपों से ज्यादा है. यह लगातार ज्यादा गोले दाग सकती है, और जल्दी फिर से तैयार हो जाती है. इसमें एडवांस टारगेटिंग और कंट्रोल सिस्टम लगे हैं, जिससे गोली ज्यादा सटीक लगती है. करीब 80% पुर्जे भारत में ही बने हैं. ATAGS एक खींचकर ले जाने वाली तोप है.

इसे किसी ट्रक से मोर्चे पर ले जाया जाता है. युद्ध में इसे जमीन पर खड़ा कर गोला-बारूद लोड किया जाता है. टारगेट कंप्यूटर से तय होता है, फिर GPS और सेंसर से सही एंगल सेट होता है. फिर गोला तेज गति से कई किलोमीटर दूर दुश्मन के ठिकाने पर गिरता है. ये तोप दुश्मन के बंकर, किले, फौजी जमावड़े या रनवे जैसे अहम ठिकानों को दूर से ही तबाह कर सकती है

अर्मेनिया को इनकी जरूरत क्यों है?

अर्मेनिया की अजरबैजान से लंबे समय से दुश्मनी चल रही है. नागोर्नो-कराबाख जैसे इलाकों को लेकर कई बार लड़ाई हो चुकी है. वहीं रूस अब पहले की तरह अर्मेनिया को हथियार नहीं दे पा रहा, इसलिए अर्मेनिया नए साथी ढूंढ रहा है, और भारत उसके लिए एक भरोसेमंद दोस्त बनकर उभरा है. ATAGS जैसी लंबी दूरी तक मार करने वाली तोपें अर्मेनिया को अपनी सीमाओं पर बैठकर दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने की ताकत देती हैं.

साथ ही हाल ही में भारत और अर्मेनिया ने डिफेंस डील की है, जिससे ये साफ हो जाता है कि अर्मेनिया अब भारत से और हथियार लेगा. इससे पहले आर्मेनिया ने ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मन के खेमे में खलबली मचाने वाली भारत की स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम को भी खरीदा था.

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