दिल्ली में हार के बाद पंजाब में टूटेगी AAP? जानें क्यों उठ रहे हैं ये सवाल

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दिल्ली में करीब 10 साल से भी ज्यादा वक्त से काबिज आम आदमी पार्टी (आप) की करारी हार का असर न सिर्फ दिल्ली की राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि पंजाब की राजनीति भी इससे अछूती नहीं रहेगी. अब आप को इस बात की आशंका सताने लगी है कि दिल्ली में हार की वजह से दिल्ली में तो बाद में, पहले पंजाब में ही पार्टी में बड़ी टूट हो जाएगी और इस बार इस टूट की जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस होगी. दरअसल राजनीति एक ऐसी आग है, जिसमें धुआं नहीं उठता. तो दिल्ली में आप की हार के बाद पंजाब में पार्टी टूट जाए तो इसमें किसी को कोई बड़ी हैरत नहीं होगी. क्योंकि पंजाब में पार्टी को बचाने की कवायद अब शुरू हो गई है और इसके लिए बकायदा अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में आप के सभी विधायकों को दिल्ली बुला लिया है, जहां पंजाब भवन में वो सभी आप विधायकों के साथ बैठक करेंगे. 

कांग्रेस ने दावा कर बढ़ाई टेंशन

दिल्ली की 70 सीटों में से महज 22 सीटें जीत पाने वाली आप और उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल की 11 फरवरी को होने वाली बैठक में ही तय हो जाएगा कि दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी का भविष्य क्या होने वाला है.ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिल्ली में हारने के तुरंत बाद पंजाब में नेता प्रतिपक्ष यानी कि कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया है कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के कम से कम 20 विधायक ऐसे हैं, जो कांग्रेस के संपर्क में हैं. कहने वाले तो ये भी कह रहे हैं कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के जो राज्यसभा सांसद हैं, वो भी अब कांग्रेस की ओर हसरत भरी नजर से देख रहे हैं. ये बात सच भी हो सकती है और कोरी कल्पना भी. सच्चाई का पता तो 11 फरवरी को लग ही जाएगा, क्योंकि अरविंद केजरीवाल की ओर से ये साफ कर दिया गया है कि पंजाब में आप के जो 92 विधायक हैं, उनके पास चाहे जो भी महत्वपूर्ण काम हो, चाहे जहां भी उनकी व्यस्तता हो, सब छोड़कर वो 11 फरवरी को दिल्ली जरूर पहुंचें. अब इस मीटिंग में पहुंचने वालों की संख्या के आधार पर तो शुरुआती तौर पर ये तय हो ही जाएगा कि प्रताप सिंह बाजवा के दावे में कितना दम है.

कांग्रेस की वजह से हुआ आप को नुकसान?

बाकी जिस तरह से दिल्ली में आप की हार हुई है और वो 22 सीटों पर सिमट गई है, उसने पंजाब के विधायकों को भी कहीं न कहीं दहशत में डाला ही होगा. पंजाब में भी 2027 में विधानसभा के चुनाव हैं. और दिल्ली की तरह पंजाब में भी आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को ही सत्ता से दरकिनार कर खुद को स्थापित किया है. दिल्ली में भले ही कांग्रेस खुद को सत्ता में नहीं ला पाई. भले ही कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई, लेकिन उसने इतने वोट तो जरूर बटोर लिए कि आप हार जाए. आप ही नहीं बल्कि कांग्रेस ने ये सुनिश्चित किया कि कम से कम अरविंद केजरीवाल तो हार ही जाएं, लेकिन पंजाब में खेल दिल्ली से अलग है. 

क्या है कांग्रेस का प्लान?

दिल्ली में कांग्रेस को सिर्फ वोट काटकर आप को हराना था और जीतने के लिए बीजेपी बैठी ही थी. लेकिन पंजाब में कांग्रेस को न सिर्फ वोट काटना है, बल्कि वोट काटकर जीतना भी है, क्योंकि वहां पर बीजेपी इतनी मजबूत नहीं है कि वो सत्ता की दावेदारी कर सके.ऐसे में कांग्रेस पंजाब में जीत के लिए हर वो मुमकिन कोशिश करेगी, जैसी कोशिश बीजेपी तमाम राज्यों में करती रही है. इसके लिए कांग्रेस को आप को तोड़ना भी होगा, तो वो तोड़ देगी और टूटने वाले भी टूट ही जाएंगे, क्योंकि दिल्ली का नतीजा उनके सामने है. बाकी तो जैसे महाराष्ट्र की शिवसेना तोड़ने के लिए बीजेपी ने एकनाथ शिंदे की खोज की थी, वैसे ही कांग्रेस भी आम आदमी पार्टी में उस Eknath Shindeकी तलाश में है, जिसके जरिए वो पंजाब में अपना हित साध सके.

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