Op Sindoor Update: भारत और पाकिस्तान के रिश्ते और उनके बीच की जंग अब तक उन्हीं की होती थी. ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसमें एक और धुरी जुड़ गई है और वो हैं – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. वो हर 10-15 दिन पर ये बयान जरूर दे देते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच अगर मई में हुए सैन्य टकराव के बीच वे न आते तो अब तक दोनों देशों का भूगोल बदल चुका होता. एक बार फिर से उन्होंने यही कहानी दोहराते हुए नाटो महासचिव मार्क रूटे के सामने भी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीजफायर का क्रेडिट खाया.डोनाल्ड ट्रंप ने अपने मुंह मियां मिट्ठू बनते हुए कहा – ‘हम युद्धों को सुलझाने में बहुत सफल रहे हैं. आपके पास हैं. भारत और पाकिस्तान आपके पास रवांडा और कांगो हैं, जो 30 साल से चल रहा था. वैसे, भारत और पाकिस्तान एक हफ्ते के भीतर न्यूक्लियर वॉर कर लेते. ये काफी बुरा था और और हमने इसे व्यापार के माध्यम सुलझाया‘.
अमेरिकी राष्ट्रपति कई मौकों पर बार-बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करवाया. हालांकि उनका ये दावा काफी अजीब है, जिसमें वे कह रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान एक हफ्ते में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर देते, अगर वे बीच में न आए होते. अमेरिका के ऐसा बेबुनियाद दावों को पाकिस्तान की ओर से मिल रहे समर्थन ने बढ़ाया है. चूंकि पाकिस्तान भारत से पड़ रही मार को रोकने के लिए अमेरिका के पास गुहार लेकर गया था, इसीलिए वो अपने आका की हां में हां मिला रहा है. उसने तो इसके लिए उन्हें नोबल पुरस्कार देने की मांग कर डाली.
ट्रंप के इस दावे को भारत हमेशा नकारता रहा है. इस महीने की शुरुआत में भी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दो पड़ोसी देशों के बीच मध्यस्थता में अमेरिकी भूमिका से इनकार किया था. न्यूजवीक के साथ इंटरव्यू में, जयशंकर ने कहा – ‘मैं आपको बता सकता हूं कि मैं उस कमरे में था, जब उपराष्ट्रपति वेंस ने 9 मई की रात को प्रधानमंत्री मोदी से बात की थी. उन्होंने यह कहा था कि पाकिस्तान भारत पर एक बहुत बड़ा हमला करेगा. हालांकि प्रधानमंत्री पाकिस्तान की धमकियों के प्रति अडिग थे. फिर अगली सुबह वाशिंगटन के साथ जब विदेश मंत्री बात की तो अमेरिकन विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तानी बातचीत के लिए तैयार हैं. फिर बात भारत और पाकिस्तान के बीच हुई, जिसमें पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्धविराम हुआ.