इकलौती बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया. अंतिम विदाई देते समय वह अपने पापा को पुकारती. लेकिन पापा तो तिरंगे में लिए हुए ताबूत में खामोश और बेजान थे. मामला हिमाचल प्रदेश के कागड़ा का है. यहां पर नागालैंड के दीमापुर में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए असम रायफल्स के जेसीओ संदीप अवस्थी का गुरुवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया.
मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के देहरा उपमंडल के हरिपुर गांव के निवासी संदीप देश सेवा के दौरान अपने प्राणों की आहुति देकर अमर हो गए और हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई. गुरुवार को उनकी पार्थिव देह हरिपुर पहुंची, जहां उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा.
जैसे ही शहीद की पार्थिव देह उनके घर पहुंची, उनकी पत्नी और बेटी सुधांशी बेसुध हो गईं. हर किसी की आंखें नम थीं और माहौल शोक में डूबा हुआ था। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था, जबकि बेटी सुधांशी अपने पिता को पुकारते हुए बिलखती रही. पूरा गांव गमगीन होकर शहीद के परिवार के साथ इस दुख में शामिल हुआ. बाद में बेटी नही पिता की चिता को मुखाग्नि दी.
बेटी सुंधाशी ने बताया कि रोजाना पापा को फोन आता था. हाल ही में वह घर से लौटे थे. घर से लौटने के बाद उनका फोन खराब हो गया था और वह ऑफिस के फोन से ही बात करते थे. मंगलवार रात को पिता के शहीद होने की सूचना मिली थी. सुंधाशी ने बताया कि वह एमएससी की पढ़ाई कर रही हैं और उनकी मां टीचर हैं.
कांगड़ा के हरिपुर स्थित श्मशानघाट पर शहीद का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।,सुधांशी ने अपने पिता की पार्थिव देह को मुखाग्नि दी. इस दृश्य ने हर किसी का दिल झकझोर दिया. पिता के अंतिम संस्कार के दौरान सुधांशी का अपने आंसुओं को रोक पाना मुश्किल था. इस दौरान सैन्य जवानों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया और पूरे सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी.