Spread the love
Hanuman Interesting Story: पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब हनुमान जी ने रावण को सबक सिखाने के लिए पूरी लंका में आग लगा दी थी, तो उनकी पूंछ में आग लग गई. लंका दहन के बाद हनुमान जी ने समुद्र में छलांग लगाकर अपनी पूंछ की आग बुझाई. हालांकि, पानी में बुझाने के बाद भी उनकी पूंछ में जलन बनी रही. इस कष्ट से निजात पाने के लिए हनुमान जी ने भगवान श्रीराम से समाधान मांगा. तब प्रभु श्रीराम ने उन्हें चित्रकूट पर्वत पर जाने का निर्देश दिया. श्रीराम ने बताया कि विंध्य पर्वत श्रृंखला पर एक स्थान है, जहां अमृत तुल्य शीतल जलधारा निरंतर प्रवाहित होती है. उन्होंने कहा कि वहां जाकर उस जलधारा में अपनी पूंछ को डुबोने से उनकी जलन समाप्त हो जाएगी. चलिए अब इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

हनुमान जी को राहत कहां मिली?
हनुमान जी श्रीराम के बताए अनुसार चित्रकूट पहुंचे और विंध्य पर्वत की एक पहाड़ी पर श्री राम रक्षा स्तोत्र का 1008 बार पाठ किया. कहा जाता है कि जैसे ही उन्होंने पाठ पूरा किया, पहाड़ी से अचानक एक शीतल जलधारा बहने लगी. उस जलधारा में स्नान करते ही हनुमान जी को अपनी पूंछ की जलन से मुक्ति मिल गई. इस पवित्र स्थान को आज हनुमान धारा के नाम से जाना जाता है. यह जलधारा पर्वत से निकलकर हनुमान जी की मूर्ति की पूंछ को छूती हुई नीचे एक कुंड में विलीन हो जाती है. आश्चर्य की बात यह है कि इस जलधारा का स्रोत आज तक किसी को नहीं मिला है और यह हमेशा प्रवाहित रहती है.